Showing posts with label dard. Show all posts
Showing posts with label dard. Show all posts

Saturday, October 25, 2008

रौशनी देते रहना

On the eve of Deepwali I am posting my poem रौशनी देते रहना,
which I have written for myself.

अपनी  राह  में फूल हो न हो फिर भी
दोस्तों की राहो के कांटे हटाते रहना

जिन्दगी को  ख्वाबों से सजाते रहना  
मुश्किलें आए तो भी सदा मुस्कराते रहना

अपना हाल-ऐ-इलम ना होने देना 
हालात को इस कदर छुपाते रखना 

ख्वाबों के सारे जनाजे डूब भी जायें
मगर ताबूतों को हमेशा संभाले रखना  

जब कभी तन्हाई आ घेरे तुझको  
अपने दिल को गेरों संग बतलाते रहना

गम उठाकर भी तू खुशिया देते रहना  
बस हर हाल में रौशनी देते रहना 

क्या बुरा है इस ज़माने में ऐ 'दीप'
ख़ुद जलकर भी रौशनी देते रहना

Sunday, July 13, 2008

Missing MNIT

...missing my college these days
...ek tanha dil aur ye tanhai ab sahi nahi jaati
...sochta hu magar jaau to jaau kaha
...bas main hu aur meri tanhaai hai yaha


किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं,
बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं,

उफ़ ख़ामोशी की ये आहें दिल को बरमाती हुईं,
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज़ दूं,